देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों की सरगर्मी के बीच इन प्रदेशों की आर्थिक सेहत पर भी बहस छिड़ गई है। जब हम चुनावी राज्यों—तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरलम और असम—की तुलना उनके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के आधार पर करते हैं, तो विकास की एक अलग ही तस्वीर उभरती है। आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि औद्योगिक विविधता और विनिर्माण की शक्ति इन राज्यों के आर्थिक कद को तय कर रही है।
वित्त वर्ष 2026-27 के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, तमिलनाडु इन सभी राज्यों में सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। लगभग 40.6 लाख करोड़ रुपये की GSDP के साथ यह न केवल इन राज्यों में शीर्ष पर है, बल्कि भारत की दूसरी सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्था भी है। तमिलनाडु की इस सफलता का श्रेय उसके मजबूत ऑटोमोबाइल हब, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और आईटी सेक्टर को जाता है।
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल लगभग 21.5 लाख करोड़ रुपये की GSDP के साथ दूसरे पायदान पर है। राज्य की ताकत उसके सेवा क्षेत्र और एमएसएमई (MSME) सेक्टर में निहित है। केरलम की अर्थव्यवस्था, जो करीब 16-16.5 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, मुख्य रूप से पर्यटन और विदेशों से आने वाले धन (रेमिटेंस) पर टिकी है। वहीं, पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला असम लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपये की GSDP के साथ इस सूची में चौथे स्थान पर है। हालांकि असम का आधार छोटा है, लेकिन चाय उत्पादन और खनिज तेल के कारण इसकी विकास दर में निरंतर सुधार देखा जा रहा है। चुनाव के यह परिणाम न केवल भविष्य की राजनीति तय करेंगे, बल्कि इन राज्यों के आगामी आर्थिक रोडमैप के लिए भी दिशा-निर्देश साबित होंगे।