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ट्रम्प ने कहा, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का टैक्स फ्री संस्थान का दर्जा करेंगे खत्म, जानिए पूरा मामला

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Posted On:Friday, May 2, 2025

मुंबई, 02 मई, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वह हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का टैक्स फ्री संस्थान का दर्जा खत्म करने जा रहे हैं। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि वे इसी के हकदार हैं। इससे पहले हार्वर्ड की 2.2 अरब डॉलर फंडिंग पर रोक लगा चुके हैं। दरअसल, ट्रम्प प्रशासन ने यूनिवर्सिटी से यह मांग की है कि वह अक्टूबर 2023 के बाद कैंपस में हुई यहूदी विरोधी घटनाओं पर बनी सभी रिपोर्ट और ड्राफ्ट भी सरकार को सौंपे। प्रशासन चाहता है कि इन रिपोर्टों को तैयार करने वाले सभी लोगों के नाम बताए जाएं और उन्हें संघीय अधिकारियों के इंटरव्यू के लिए उपलब्ध कराया जाए। यूनिवर्सिटी ने इस आदेश के खिलाफ कोर्ट में केस भी किया है। यूनिवर्सिटी का आरोप है कि ट्रम्प सरकार राजनीतिक दबाव बनाकर शैक्षणिक कामकाज पर कंट्रोल करना चाहती है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स ने भी 12 अप्रैल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन के खिलाफ मैसाचुसेट्स की फेडरल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट केस दायर किया था। प्रोफेसर्स के दो ग्रुप ने यूनिवर्सिटी फंड को रोकनी की धमकी के खिलाफ यह केस दर्ज किया था। दरअसल उस दौरान ट्रम्प प्रशासन हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को मिलने वाले 9 अरब डॉलर के फंड की समीक्षा कर रहा था। हार्वर्ड के प्रोफेसर्स ने हवाला दिया कि ट्रम्प का यह फैसला अमेरिकी संविधान के फर्स्ट अमेंडमेंट (प्रथम संशोधन) का उल्लंघन करता है। प्रोफेसर्स का आरोप है कि यूनिवर्सिटी फंड में कटौती करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है। कोर्ट में दायर याचिका में ट्रम्प प्रशासन के फैसले पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।

आपको बता दें, हाल ही में ट्रम्प प्रशासन ने हार्वर्ड को एक चिट्ठी भेजी थी। इस चिट्ठी में यूनिवर्सिटी को कुछ शर्तें पूरी करने के लिए कहा गया था। ऐसा न करने पर यूनिवर्सिटी की संघीय फंडिंग पर रोक लगाने की धमकी दी गई। इस कदम के पीछे ट्रम्प प्रशासन का दावा था कि हार्वर्ड जैसे प्रतिष्ठित संस्थान एंटी-सेमिटिज्म (यहूदियों के खिलाफ नफरत) को रोकने में नाकाम रहे हैं। प्रशासन ने आरोप लगाया कि कैंपस में यहूदी छात्रों और प्रोफेसरों के खिलाफ भेदभाव हो रहा है। यूनिवर्सिटी को मिलने वाली फंडिंग सर्च, स्टूडेंट स्कॉलरशिप, और कई साइंस और मेडिकल प्रोजेक्ट्स के लिए बेहद जरूरी है। दरअसल, गाजा में जारी इजराइल-हमास जंग के खिलाफ पिछले साल अमेरिका की कई यूनिवर्सिटीज में फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में हजारों छात्रों ने हिस्सा लिया था। AP की रिपोर्ट के मुताबिक 1000 से ज्यादा छात्र गिरफ्तार भी हुए। इस दौरान हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में छात्रों ने फिलिस्तीनी झंडा फहराया था। यूनिवर्सिटी ने इसे पॉलिसी के खिलाफ बताते हुए छात्रों के खिलाफ एक्शन लेने की बात कही थी।


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