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xचीन के 'शैडो ट्रांस-शिपमेंट' नेटवर्क पर अमेरिका का कड़ा रुख: भारत समेत 40 से अधिक देशों पर अमेरिकी टैरिफ से बचने में मदद का आरोप

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Posted On:Friday, August 14, 2026

अमेरिका और भारत के व्यापारिक संबंधों के बीच तल्खी उस समय और बढ़ गई जब अमेरिकी प्रशासन के शीर्ष व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने 'द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम' नाम से एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि चीन अमेरिकी शुल्कों (टैरिफ) से बचने के लिए भारत, मैक्सिको, कनाडा, जापान और यूरोपीय संघ सहित 40 से अधिक देशों के माध्यम से अपना सामान अमेरिकी बाजारों में अवैध रूप से पहुंचा रहा है। नवारो के मुताबिक, यह कथित 'शैडो ट्रांस-शिपमेंट नेटवर्क' वर्ष 2018 में चीन पर लगाए गए सेक्शन 301 टैरिफ के बाद से अत्यधिक सक्रिय हो गया है।

अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी कंपनियां तीसरे देशों में बहुत मामूली प्रसंस्करण (Minor Processing), री-लेबलिंग, री-पैकेजिंग और बिलों में बदलाव करके सामान का मूल देश (Country of Origin) बदल देती हैं। इससे मूल रूप से चीनी उत्पाद अन्य देशों के निर्मित सामान के रूप में अमेरिका में प्रवेश कर जाते हैं। इस वैश्विक हेरफेर का अनुमानित वार्षिक मूल्य 40 अरब डॉलर से 303 अरब डॉलर के बीच बताया गया है। रिपोर्ट में भारत के पुणे-गुजरात-चेन्नई औद्योगिक गलियारे का विशेष जिक्र किया गया है, जहां से पंप और कंप्रेसर जैसे घटकों को भारतीय उत्पाद बताकर अमेरिकी औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करने की बात कही गई है।

इस तरह के अवैध सीमा-पार व्यापार पर कड़ा प्रहार करने के लिए अमेरिका अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से लैस 'डिटेक्टिव बॉर्डर' प्रणाली तैनात करने जा रहा है। यह AI सिस्टम अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) की मदद करेगा और शिपमेंट डेटा, कंपनियों के स्वामित्व व विनिर्माण क्षमता का विश्लेषण कर धोखाधड़ी वाले सामान की पहचान करेगा।


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