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Nepal Gen-Z Protest: दुबई में छिपे है नेपाल के पूर्व पीएम ओली, देश में विद्रोह, कैसे रुकेगा आंदोलन?

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Posted On:Wednesday, September 10, 2025

भारत-नेपाल सीमा पर हाल ही में बढ़ी राजनीतिक हलचल का केंद्र रहे नेपाल में हुए हिंसक 'Gen‑Z' विरोध प्रदर्शनों का असर अब तक जारी है। सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध, युवाओं का असंतोष और राजनीतिक अस्थिरता ने मिलकर देश को एक गतिरोध में खड़ा कर दिया है।


सोशल मीडिया प्रतिबंध से भड़का संघर्ष

4 सितंबर 2025 को नेपाल सरकार ने 26 प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, X (पूर्व ट्विटर), यूट्यूब आदि पर बैन लगा दिया, क्योंकि ये प्लेटफॉर्म सरकारी पंजीकरण से सहमत नहीं हुए थे सरकार का कहना था कि यह कदम फेक न्यूज, घृणा फैलाने वाली सामग्री और धोखाधड़ी से निपटने के लिए जरूरी था, लेकिन इसे आम लोग और विशेषकर युवा वर्ग ने स्वतंत्रता पर हमला मानते हुए अपनाया

इसके बाद देशभर में "Gen‑Z Revolution" नाम से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन भड़क उठे। इन प्रदर्शनों में 19 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले गए: प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, नेतृत्व के घर, होटलों और अन्य महत्वपूर्ण इमारतों में आग लगाने की घटना सामने आ


प्रधानमंत्री ओली का इस्तीफा

उपद्रव और हिंसा के बदले सरकार ने सोशल मीडिया प्रतिबंध वापस लिया — लेकिन तब तक हालात नियंत्रित से बाहर हो चुके थेविरोध और राजनीतिक दबाव बढ़ते देखकर प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया

इस कदम ने स्पष्ट किया कि:

  • देश में सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर जनता में गहरा प्रतिरोध था।

  • युवा वर्ग की मांगें सिर्फ एक ट्विटर की ढील तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि राजनीतिक परिवर्तन तक पहुंच गईं।


क्या बदलाव हो सकता है?

प्रदर्शनकारियों ने केवल सोशल मीडिया प्रतिबंध नहीं हटाया, बल्कि लोकतांत्रिक सुधार की मांग भी उठाई। विरोध की तेज़ी सरकार को अस्थिर कर गई और इसने राजनीतिक परिवर्तन की जड़ें मजबूत कीं

यह घटना एक संकेत है कि अब नेपाल में युवा ही परिवर्तन की धुरी बने हैं और उनके आंदोलन ने सियासी भविष्य को प्रभावित किया है।


निष्कर्ष

नेपाल में सोशल मीडिया पर बैन ने एक युवा‑जनित आक्रोश को जन्म दिया जिसने देश को राजनीतिक संकट में धकेल दिया। इस संकट की तीव्रता देखते हुए प्रधानमंत्री ओली ने इस्तीफ़ा देकर खुद को पीछे किया, पर प्रश्न यह है: क्या यह आंदोलन सिर्फ एक सुरक्षात्मक कदम था या इससे एक नया लोकतांत्रिक अध्याय शुरू हो सकता है? नेपाल की राजनीतिक दिशा अब 'Gen‑Z' की आवाज के इर्द‑गिर्द घूमने वाली नजर आ रही है।


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