ताजा खबर
अडानी अहमदाबाद मैराथन को मिली बड़ी ग्लोबल पहचान, वर्ल्ड एथलेटिक्स कैलेंडर में हुआ शामिल   ||    IIM अहमदाबाद के गोल्ड मेडलिस्ट शुभम गोयल की कहानी, 30 लाख के पैकेज से माइक्रोसॉफ्ट कनाडा में 13 लोगो...   ||    IT रेड पर रकुल प्रीत सिंह ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- 20 साल की उम्र से भर रही हूं टैक्स   ||    ‘भारत में अब पहले जैसी शांति नहीं’, बयान पर घिरे संजय दत्त ने दी सफाई, बोले- मेरा मकसद किसी को ठेस प...   ||    अविनाश मिश्रा बने ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ के विनर, रोहित शेट्टी की ट्रॉफी के साथ जीते लाखों और नई कार   ||    ‘रणबाली’ की टिकट कीमतों पर मैथ्री मूवी मेकर्स ने तोड़ी चुप्पी, बोले- नहीं होगी कोई बढ़ोतरी   ||    विद्युत जामवाल बने धलसिम, ‘स्ट्रीट फाइटर’ में दिखेगा योग और एक्शन का जबरदस्त मेल   ||    बंदर और लंगूर में क्या है अंतर? जानें इनकी पहचान, खानपान और सामने आने पर बरतने वाली सावधानियां   ||    90 वर्ष की उम्र में जापानी बॉडीबिल्डर ने जीता 19वां राष्ट्रीय खिताब, शाकाहारी डाइट से सबको चौंकाया   ||    आईसीए ग्लोबल बोर्ड में चुने जाने के बाद अहमदाबाद पहुंचे इफको चेयरमैन दीलीप सांघाणी, जोरदार स्वागत   ||   

गाजा जाएंगे मुनीर के लड़ाके, US के हाथों बिकी पाकिस्तान की सेना?

Photo Source :

Posted On:Saturday, December 20, 2025

पाकिस्तान इस समय एक कठिन कूटनीतिक चौराहे पर खड़ा है। एक तरफ वह अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए अमेरिका के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करना चाहता है, तो दूसरी तरफ गाजा में शांति सेना भेजने के अमेरिकी दबाव ने इस्लामाबाद की रातों की नींद उड़ा दी है। नवनियुक्त अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'गाजा 20-पॉइंट योजना' के केंद्र में मुस्लिम देशों की सेनाओं को गाजा में तैनात करना शामिल है, और इस योजना में पाकिस्तान की भूमिका को सबसे अहम माना जा रहा है।

प्रस्तुत लेख में हम इस जटिल स्थिति और इसके संभावित परिणामों का विश्लेषण करेंगे।


ट्रंप की गाजा योजना और 'इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स' (ISF)

डोनाल्ड ट्रंप का प्रस्ताव है कि गाजा में युद्ध के बाद शांति व्यवस्था बहाल करने और पुनर्निर्माण के लिए एक 'इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स' (ISF) का गठन किया जाए। इस बल में मुख्य रूप से उन मुस्लिम देशों के सैनिकों को शामिल करने का सुझाव है जिनके अमेरिका के साथ अच्छे संबंध हैं।

ISF की मुख्य जिम्मेदारियां:

  • गाजा में सुरक्षा और कानून व्यवस्था बहाल करना।

  • मलबे में तब्दील हो चुके बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण।

  • मानवीय सहायता का वितरण सुनिश्चित करना।

  • हमास के प्रभाव को कम कर एक नई प्रशासनिक व्यवस्था के लिए जमीन तैयार करना।

मार्को रुबियो का बयान और अमेरिकी दबाव

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में पुष्टि की है कि पाकिस्तान ने इस मिशन का हिस्सा बनने में 'रुचि' दिखाई है। रुबियो के अनुसार, अमेरिका पाकिस्तान की इस पेशकश की सराहना करता है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी देश से अंतिम प्रतिबद्धता मांगने से पहले उन्हें मिशन की रूपरेखा और सुरक्षा गारंटी के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

हालांकि, पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि वॉशिंगटन लगातार पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पर दबाव बना रहा है। जनरल मुनीर जल्द ही अमेरिका की यात्रा पर जा सकते हैं, जहाँ उनकी ट्रंप से मुलाकात संभावित है। यह पिछले छह महीनों में उनकी तीसरी मुलाकात होगी, जो यह संकेत देती है कि गाजा का मुद्दा द्विपक्षीय वार्ता के केंद्र में है।

पाकिस्तान के लिए 'आगे कुआं, पीछे खाई'

पाकिस्तान सरकार और सेना के लिए यह फैसला लेना आसान नहीं है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:

  1. घरेलू आक्रोश: पाकिस्तान की जनता में इजरायल के खिलाफ और फिलिस्तीन के समर्थन में भारी भावनाएं हैं। यदि पाकिस्तानी सेना गाजा में उतरती है और वहां हमास (जिसे पाकिस्तानी अवाम का एक बड़ा हिस्सा प्रतिरोध का चेहरा मानता है) के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है, तो पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है।

  2. हमास और हथियार: पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान हमास को निशस्त्रीकरण करने का काम नहीं करेगा। पाकिस्तान केवल 'शांति स्थापना' और 'पुनर्निर्माण' तक सीमित रहना चाहता है।

  3. आर्थिक मजबूरी: पाकिस्तान को IMF के कर्ज और अमेरिकी समर्थन की सख्त जरूरत है। अमेरिका को नाराज करना पाकिस्तान की आर्थिक सेहत के लिए घातक हो सकता है।

निष्कर्ष

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने फिलहाल किसी भी अंतिम निर्णय से इनकार किया है। लेकिन जनरल आसिम मुनीर की वाशिंगटन यात्रा यह तय करेगी कि पाकिस्तान अपनी वैश्विक छवि सुधारने के लिए गाजा की दलदल में उतरने का जोखिम उठाएगा या नहीं। यह न केवल पाकिस्तान की विदेश नीति की परीक्षा है, बल्कि जनरल मुनीर के नेतृत्व की भी सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है।


अहमदाबाद और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. ahmedabadvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.