अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अहमदाबाद के रियल एस्टेट बाजार की सुस्ती अब रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर भी भारी पड़ने लगी है। नए सौदों की रफ्तार काफी धीमी हो गई है और कई ऐसे प्रोजेक्ट्स, जो पूरी तरह बनकर तैयार हैं, वे भी अनसोल्ड फ्लैट्स के बोझ तले दबे हुए हैं। बाजार की इस कमजोर डिमांड ने डेवलपर्स के प्लान्स से लेकर उनकी प्रॉफिटेबिलिटी तक पर असर डाल दिया है। हालात ऐसे हैं कि बिल्डर्स अब नए प्रोजेक्ट हाथ में लेने से भी बचने लगे हैं।
ताजा आंकड़े भी यही दिखाते हैं कि पिछले छह महीनों में रिडेवलपमेंट के लिए सिर्फ करीब 20 एमओयू साइन हुए हैं, जबकि साल की शुरुआत में ही चार महीनों में लगभग 80 एमओयू हुए थे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले 18 महीनों में तैयार हुए प्रोजेक्ट्स में 20–25% स्टॉक अभी भी बिना बिका पड़ा है। एसोसिएशन अध्यक्ष जितेंद्र शाह के अनुसार, सेक्टर की यह सुस्ती रिडेवलपमेंट की गति को सीधे प्रभावित कर रही है और डेवलपर्स मार्जिन पर भी इसका बड़ा दबाव महसूस कर रहे हैं।
रिडेवलपमेंट की चुनौती यह है कि इसमें पुराने निवासियों को नए घर देने के बाद जो अतिरिक्त फ्लैट बचते हैं, उन्हें बिल्डर को ओपन मार्केट में बेचना होता है। लेकिन अभी मांग कम होने की वजह से यह स्टॉक बिक नहीं पा रहा है, जिसके कारण कैश फ्लो रुक रहा है और प्रोजेक्ट्स की शुरुआत तक अटक जा रही है। कई जगह तो एमओयू साइन हो चुके हैं, लेकिन न डिमोलिशन शुरू हुआ है और न ही निर्माण, जिससे वहां रहने वाले परिवारों में बेचैनी बढ़ रही है।
फिर भी रियल एस्टेट खिलाड़ी मानते हैं कि आगे जाकर सेंटिमेंट सुधर सकता है। लोगों में रिडेवलपमेंट को लेकर जागरूकता बढ़ी है और शहर के मध्य इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी के चलते मांग दोबारा उछल सकती है। नारनपुरा, नवरंगपुरा, पालड़ी और वासना जैसे इलाकों में सप्लाई बढ़ी है और मजबूत ब्रांड वाले डेवलपर्स के प्रोजेक्ट्स जल्दी बिक भी रहे हैं। उम्मीद यही है कि आने वाले महीनों में बाजार की सुस्ती टूटेगी और रिडेवलपमेंट की रफ्तार दोबारा पकड़ में आएगी।