अहमदाबाद न्यूज डेस्क: कुवैत में नौकरी करने वाले एक भारतीय के भारत में अपने परिवार को पैसे भेजने पर इनकम टैक्स विभाग ने बड़ी रकम को लेकर सवाल उठाए। मामला अहमदाबाद की इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (आईटीएटी) तक पहुंचा, जहां टैक्सपेयर्स को आंशिक राहत मिली। यह मामला राहुलकुमार नरशीभाई पटेल बनाम आईटीओ, वार्ड-2, इंटरनेशनल टैक्सेशन, अहमदाबाद से जुड़ा है और असेसमेंट ईयर 2019-20 का है।
मामले के मुताबिक, राहुलकुमार की कुवैत में मिलने वाली सैलरी नियमित रूप से नेशनल बैंक ऑफ कुवैत के खाते में जमा होती थी। वहां से उन्होंने भारत में आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक के एनआरई और एनआरओ खातों में पैसे ट्रांसफर किए। इन लेन-देन की जानकारी स्पेसिफाइड फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन (एसएफटी) रिपोर्टिंग सिस्टम के जरिए टैक्स अधिकारियों तक पहुंची। राहुलकुमार ने पहले मूल इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया था और नोटिस मिलने के बाद 'निल इनकम' वाला रिटर्न दाखिल किया, लेकिन शुरुआत में बैंक स्टेटमेंट और लेन-देन का पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं कराया।
इसी आधार पर असेसिंग ऑफिसर ने करीब 3.63 करोड़ रुपये को इनकम टैक्स एक्ट की धारा 69ए के तहत 'अनएक्सप्लेन्ड मनी' माना और धारा 115बीबीई के तहत टैक्स लगाया। अपील के दौरान राहुलकुमार ने कुवैत के बैंक स्टेटमेंट, सैलरी से जुड़े दस्तावेज और भारत के बैंक खातों का रिकॉर्ड ट्रिब्यूनल के सामने पेश किया। दस्तावेजों की जांच के बाद आईटीएटी अहमदाबाद ने आईसीआईसीआई बैंक से जुड़ी 5.52 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि को हटाने का फैसला किया, क्योंकि सिर्फ एसएफटी आंकड़ों और बैंक रिकॉर्ड में अंतर होने के आधार पर इसे अनएक्सप्लेन्ड मनी नहीं माना जा सकता।
वहीं, एचडीएफसी बैंक से जुड़ी करीब 2.50 करोड़ रुपये की रकम के मामले को दोबारा जांच के लिए असेसिंग ऑफिसर के पास भेज दिया गया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि पैसा कुवैत से मिली विदेशी सैलरी भारत भेजकर हासिल हुआ था या पहले से मौजूद रकम को दोबारा निवेश किया गया था, तो उस पर अतिरिक्त टैक्स नहीं लगाया जाना चाहिए। 24 अप्रैल 2026 के इस फैसले से यह साफ होता है कि विदेश में कमाई गई रकम को सिर्फ भारत भेजे जाने के आधार पर अपने आप 'अनएक्सप्लेन्ड इनकम' नहीं माना जा सकता, लेकिन टैक्सपेयर्स के लिए सैलरी स्लिप, विदेशी और भारतीय बैंक स्टेटमेंट, रेमिटेंस रिकॉर्ड और एसएफटी से लेन-देन का मिलान जैसे दस्तावेज संभालकर रखना बेहद जरूरी है।