ताजा खबर
अडानी अहमदाबाद मैराथन को मिली बड़ी ग्लोबल पहचान, वर्ल्ड एथलेटिक्स कैलेंडर में हुआ शामिल   ||    IIM अहमदाबाद के गोल्ड मेडलिस्ट शुभम गोयल की कहानी, 30 लाख के पैकेज से माइक्रोसॉफ्ट कनाडा में 13 लोगो...   ||    IT रेड पर रकुल प्रीत सिंह ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- 20 साल की उम्र से भर रही हूं टैक्स   ||    ‘भारत में अब पहले जैसी शांति नहीं’, बयान पर घिरे संजय दत्त ने दी सफाई, बोले- मेरा मकसद किसी को ठेस प...   ||    अविनाश मिश्रा बने ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ के विनर, रोहित शेट्टी की ट्रॉफी के साथ जीते लाखों और नई कार   ||    ‘रणबाली’ की टिकट कीमतों पर मैथ्री मूवी मेकर्स ने तोड़ी चुप्पी, बोले- नहीं होगी कोई बढ़ोतरी   ||    विद्युत जामवाल बने धलसिम, ‘स्ट्रीट फाइटर’ में दिखेगा योग और एक्शन का जबरदस्त मेल   ||    बंदर और लंगूर में क्या है अंतर? जानें इनकी पहचान, खानपान और सामने आने पर बरतने वाली सावधानियां   ||    90 वर्ष की उम्र में जापानी बॉडीबिल्डर ने जीता 19वां राष्ट्रीय खिताब, शाकाहारी डाइट से सबको चौंकाया   ||    आईसीए ग्लोबल बोर्ड में चुने जाने के बाद अहमदाबाद पहुंचे इफको चेयरमैन दीलीप सांघाणी, जोरदार स्वागत   ||   

गुजरात के शहरों में जमीन धंसने का खतरा बढ़ा: अहमदाबाद, सूरत और कच्छ संवेदनशील

Photo Source : Google

Posted On:Thursday, September 4, 2025

अहमदाबाद न्यूज डेस्क: उत्तराखंड में जोशीमठ और उत्तरकाशी में जमीन धंसने की घटनाओं ने पहले ही चेतावनी दी थी, लेकिन अब यही संकट देश के मैदानी हिस्सों में भी दिखाई देने लगा है। गुजरात में हाल ही में किए गए शोध में अहमदाबाद, सूरत और कच्छ जैसे शहरों में जमीन धीरे-धीरे धंसने की गंभीर स्थिति सामने आई है।

शोध के अनुसार, अहमदाबाद में 2017 से 2020 के बीच तीन बड़े सब्सिडेंस जोन पहचाने गए, जहां जमीन सालाना 2.5 सेंटीमीटर तक धंसी। पिपलाज इलाके में 2014 से 2020 के बीच सालाना 4.2 सेंटीमीटर और 2020–2023 में बापल और वटवा इलाके में 3.5 सेंटीमीटर की दर से धंसाव हुआ। सूरत में वार्षिक धंसाव 0.01 से 6.7 सेंटीमीटर तक दर्ज हुआ, जिसमें करंज क्षेत्र सबसे प्रभावित रहा। कच्छ में औसत धंसाव 4.3 मिलीमीटर प्रति वर्ष है, जबकि कुछ इलाकों में यह 2.2 सेंटीमीटर तक पहुंच गया।

शोध में भूजल का अत्यधिक दोहन मुख्य कारण बताया गया है। ग्राउंडवॉटर वाले परतों में दबाव घटने से मिट्टी सघन होकर बैठती है, जिससे भवनों में दरारें, छत और दीवारों में क्रैक जैसी समस्याएं सामने आती हैं। अध्ययन में InSAR तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जो उपग्रह की मदद से मिलीमीटर स्तर की सटीकता से जमीन के धंसाव को मापती है।

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अगर इस खतरे को गंभीरता से नहीं लिया गया तो शहरी बुनियादी ढांचा, जल प्रणालियां, कृषि और लाखों लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण और भूजल का अंधाधुंध दोहन इसे और गंभीर बना रहा है।


अहमदाबाद और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. ahmedabadvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.