अहमदाबाद न्यूज डेस्क: दिल्ली में पले-बढ़े शुभम गोयल ने आईआईएम अहमदाबाद से गोल्ड मेडल हासिल किया और आज कनाडा में माइक्रोसॉफ्ट की 13 लोगों वाली प्रोडक्ट टीम संभाल रहे हैं। वह कंपनी में प्रिंसिपल प्रोडक्ट लीड के पद पर हैं। हालांकि आईआईएम अहमदाबाद में दाखिला लेते समय उनका लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतना नहीं था। उनका फोकस रोज कुछ नया सीखने, मेहनत करने और अपने काम में लगातार बेहतर होने पर था। इसी सोच ने उन्हें अपनी बैच में रैंक 1 तक पहुंचाया।
शुभम ऐसे परिवार से आते हैं जहां पढ़ाई को हमेशा काफी महत्व दिया गया। उनके नाना और दादा, दोनों दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रहे हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं और पिता व भाई सरकारी नौकरी में हैं। आईआईएम में पढ़ाई के दौरान उन्होंने सिर्फ पढ़ाई पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि अच्छे रिश्ते बनाने, नेटवर्किंग, सॉफ्ट स्किल्स और टीम के साथ काम करने की समझ भी विकसित की। उनका कहना है कि आईआईएम ने उनकी सोच को पूरी तरह बदला नहीं, बल्कि पहले से मौजूद नजरिए को और मजबूत किया।
आईआईएम अहमदाबाद से निकलने के बाद शुभम ने करीब 27-30 लाख रुपये के शुरुआती सालाना पैकेज पर बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप में मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर करियर शुरू किया। अच्छी नौकरी के बावजूद उनके मन में यह सवाल था कि क्या वह लंबे समय तक इसी फील्ड में काम करना चाहते हैं। बीसीजी में बिजनेस और मैनेजमेंट को समझने का अनुभव लेने के बाद उन्होंने प्रोडक्ट मैनेजमेंट की तरफ जाने का फैसला किया और माइक्रोसॉफ्ट में प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर नई शुरुआत की। कोविड के दौरान उनके करियर के साथ निजी जिंदगी में भी बड़ा बदलाव आया और 2021 में उन्होंने अपने पिता को खो दिया। इस मुश्किल दौर ने उनके लिए करियर और जिंदगी में संतुलन की अहमियत और बढ़ा दी।
आज माइक्रोसॉफ्ट में पांच साल से ज्यादा समय पूरा कर चुके शुभम कनाडा के ऑपरेशंस में प्रिंसिपल प्रोडक्ट लीड हैं और 13 लोगों की टीम संभालते हैं। युवाओं को सलाह देते हुए उनका कहना है कि आईआईएम जैसी संस्था से निकलने के बाद सिर्फ बड़ा सैलरी पैकेज ही सफलता का पैमाना नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक मजबूत स्किल्स, काम करने की अच्छी आदतें और लगातार सीखते रहना ज्यादा जरूरी है। एआई को लेकर भी उनका मानना है कि यह नए मौके और काम की रफ्तार बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन हर समस्या का समाधान एआई नहीं है। शुभम के लिए अब सफलता का मतलब सिर्फ करियर में आगे बढ़ना नहीं, बल्कि अपने रिश्तों और निजी जिंदगी के लिए भी समय निकालना है।