अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस ने 1.5 करोड़ रुपये के हाई-प्रोफाइल 'बॉस स्कैम' (Boss Scam) मामले में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए दो मुख्य आरोपियों को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में इमरान अली प्यादा और कोलकाता निवासी इंजामुल मुजीबुर मोल्ला शामिल हैं। इमरान अली एक बीए स्नातक है जो एयरटेल, जियो, वीआई (Vi) और बीएसएनएल (BSNL) जैसे प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर्स के लिए सेल्स एजेंट के रूप में काम कर चुका था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह नेटवर्क चीन, हांगकांग और पाकिस्तान (इस्लामाबाद स्थित कॉल सेंटर) में बैठे साइबर अपराधियों को बुनियादी ढांचा और सिम कार्ड मुहैया करा रहा था।
यह मामला जून 2026 में तब सामने आया जब अहमदाबाद की एक निजी कंपनी के कर्मचारी ने फर्जी वरिष्ठ अधिकारी बनकर भेजे गए संदेशों के झांसे में आकर 1.5 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। हालांकि, त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर पुलिस ने इसमें से ₹1.3 करोड़ की राशि रिकवर कर ली थी। पुलिस ने गिरोह के पास से 8 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और 4,500 फर्जी सिम कार्ड बरामद किए हैं। नेटवर्क द्वारा अब तक साइबर अपराधियों को लगभग 21,000 ओटीपी (OTPs) ₹100 प्रति ओटीपी की दर से बेचे गए थे। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इस गिरोह के नंबरों से जुड़े 26 राज्यों के 251 शिकायतें दर्ज पाई गई हैं, जिसके बाद 10,000 से अधिक संक्रमित डिवाइसेज को डिएक्टिवेट कर दिया गया है।
ठगी का तरीका और मोडस ऑपरेंडी (Modus Operandi):
बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग: इमरान अली ग्राहकों के सिम एक्टिवेशन के समय उनके बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट्स का गलत इस्तेमाल कर गुप्त रूप से उनके नाम पर अतिरिक्त डमी सिम एक्टिवेट कर लेता था।
व्हाट्सएप हाइजैकिंग और फर्जी ओटीपी: इन डमी सिम पर मिलने वाले एक्टिवेशन ओटीपी को अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों को पास कर दिया जाता था, जिससे उनके नंबरों पर व्हाट्सएप अकाउंट चालू हो जाते थे।
मालवेयर और जिप (ZIP) फाइल अटैक: आरोपी कंपनी के अधिकारियों को महत्वपूर्ण दस्तावेज का झांसा देकर जिप फाइल (ZIP File) व्हाट्सएप या ईमेल पर भेजते थे। फाइल में छिपा चाइनीज मालवेयर कंप्यूटर में डाउनलोड होते ही व्हाट्सएप वेब (WhatsApp Web) सेशन का कंट्रोल अपराधियों के हाथ में दे देता था।
सीईओ बनकर धोखाधड़ी: अपराधी अपने नंबर को कंपनी के सीईओ या डायरेक्टर के नाम से सेव कर अकाउंट्स विभाग के कर्मचारियों को तत्काल पेमेंट करने के फर्जी निर्देश भेजते थे।
अहमदाबाद पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत के अनुसार, आरोपी पिछले 4-5 वर्षों से इस तरह की गतिविधियों में शामिल थे और पहचान छिपाने के लिए टेलीग्राम से व्हाट्सएप ग्रुप्स पर शिफ्ट हो गए थे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के सहयोग से जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात जिप फाइल, लिंक या अनधिकृत निर्देश को बिना सत्यापन के न खोलें।