राजस्थान की मिट्टी, धूल भरी हवाएं, सत्ता की खींचतान और रिश्तों में छिपे संघर्ष—इन सबका जबरदस्त मेल देखने को मिल रहा है राजस्थानी फिल्म ‘धूड’ (सैंडस्टॉर्म) के ट्रेलर में। लंबे इंतजार के बाद फिल्म का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है और इसे जयपुर में आयोजित एक खास कार्यक्रम में कास्ट और क्रू की मौजूदगी में लॉन्च किया गया। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ‘धूड’ राजस्थान की पहली पैन-इंडिया थिएट्रिकल रिलीज वाली राजस्थानी फिल्म बनने जा रही है। यानी राजस्थान की कहानी अब सिर्फ स्थानीय दर्शकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देशभर के सिनेमाघरों में अपनी जगह बनाएगी।
ट्रेलर की शुरुआत ही दर्शकों को 1990 के दशक के राजस्थान में ले जाती है, जहां जिंदगी आसान नहीं है और हर रिश्ते के पीछे कोई न कोई स्वार्थ, डर या मजबूरी छिपी नजर आती है। कहानी में सत्ता, लालच, परिवार की विरासत और इज्जत बचाए रखने का दबाव एक-दूसरे से टकराता दिखाई देता है। यशपाल शर्मा फिल्म के केंद्र में हैं और उनके किरदार की गंभीरता ट्रेलर में साफ नजर आती है। उनके साथ अलका अमीन, भवानी सिंह चौहान और विवेक पारीक भी अहम भूमिकाओं में हैं, जो कहानी को अलग-अलग रंग देते हैं। कुल मिलाकर ट्रेलर किसी चमकदार दुनिया के बजाय राजस्थान की कच्ची और वास्तविक तस्वीर दिखाने की कोशिश करता है।
‘धूड’ का सबसे मजबूत पहलू इसका माहौल है। ऊबड़-खाबड़ रास्ते, धूल से भरे इलाके, पारंपरिक परिवेश और राजस्थान की खास लोकेशंस ट्रेलर को एक अलग पहचान देते हैं। दमदार संवादों के साथ बैकग्राउंड म्यूजिक और साउंड डिजाइन कहानी में तनाव बढ़ाने का काम करते हैं। हर तरफ जैसे कोई अनकहा खतरा मंडरा रहा हो और इसी वजह से फिल्म सिर्फ पारिवारिक ड्रामा नहीं, बल्कि एक थिएट्रिकल थ्रिलर का स्वाद भी देती नजर आती है। फिल्म की कहानी भले ही एक खास दौर और इलाके से जुड़ी हो, लेकिन परिवार, सत्ता और अस्तित्व की लड़ाई जैसे मुद्दे इसे व्यापक दर्शकों से जोड़ने की कोशिश करते हैं।
फिल्म में यशपाल शर्मा के साथ अलका अमीन और भवानी सिंह चौहान नजर आएंगे, जबकि विवेक पारीक, प्रवीण चौधरी और वानिक्की त्यागी इस फिल्म से अपनी शुरुआत कर रहे हैं।आनंद सिंह चौहान ने फिल्म की कहानी लिखने के साथ इसका निर्देशन भी किया है। ‘धूड’ को समर जैन, नरेंद्र कृष्णिया, मुकेश पारीक, डीएस चौहान और अभिषेक चोपड़ा ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म के संगीत और साउंडट्रैक की जिम्मेदारी मेहुल सुरती ने संभाली है, जिन्हें गुजराती फिल्म ‘हेल्लारो’ में अपने काम के लिए जाना जाता है। वहीं मिराज सिनेमाज फिल्म की थिएट्रिकल रिलीज में सहयोग कर रहा है।
अब असली परीक्षा सिनेमाघरों में होगी, क्योंकि ‘धूड’ सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि राजस्थानी सिनेमा को बड़े मंच पर ले जाने की कोशिश भी है। अपनी भाषा, संस्कृति और स्थानीय रंग को बरकरार रखते हुए फिल्म देशभर के दर्शकों तक पहुंचने की तैयारी में है। ट्रेलर में रहस्य, रिश्तों की उलझन, सत्ता की भूख और राजस्थान का रॉ अंदाज पहले ही नजर आ रहा है। ऐसे में 23 अक्टूबर को रिलीज होने वाली ‘धूड’ से उम्मीदें बढ़ना स्वाभाविक है। अगर फिल्म ट्रेलर वाली पकड़ बनाए रखने में कामयाब रही, तो राजस्थान की यह ‘धूल भरी आंधी’ बॉक्स ऑफिस पर दूर तक असर छोड़ सकती है।
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