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वित्तीय क्षेत्र में बड़ा सुधार: आईबीसी के तहत लेनदारों ने वापस पाए ₹4.11 लाख करोड़; दिवाला शोधन प्रक्रिया में नए संशोधन लागू

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Posted On:Wednesday, May 20, 2026

नयी दिल्ली: भारत के कॉर्पोरेट और बैंकिंग क्षेत्र को डूबे हुए कर्ज (NPA) से मुक्ति दिलाने में ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवाला संहिता (IBC) एक गेम-चेंजर साबित हुई है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा नई दिल्ली में 'दिवाला और दिवालियापन (संशोधन) अधिनियम, 2026' पर आयोजित एक उच्च स्तरीय कार्यशाला में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 तक देश में 'कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया' (CIRP) के तहत 8,800 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इन मामलों में स्वीकृत की गई विभिन्न समाधान योजनाओं के माध्यम से बैंकों और वित्तीय लेनदारों ने अब तक ₹4.11 लाख करोड़ से अधिक की डूबी हुई धनराशि को सफलतापूर्वक वापस पा लिया है।

4,000 से अधिक कंपनियों का पुनरुद्धार

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने बताया कि आईबीसी का मुख्य उद्देश्य कंपनियों को बंद करना या उनका परिसमापन करना नहीं, बल्कि उन्हें नया जीवन देना है:

  • कारोबार का पुनर्गठन: इस अनूठे कानून के जरिए अब तक कर्ज के बोझ तले दबी 4,000 से अधिक कंपनियों को समयबद्ध समाधान, आपसी निपटान या अपीलीय प्रक्रियाओं के माध्यम से दिवालिया होने से बचाया गया है। इससे बाजार में ऋण चुकाने की एक नई स्वस्थ संस्कृति विकसित हुई है।

  • आधुनिक सुधार शामिल: सचिव ने हाल ही में किए गए नीतिगत बदलावों जैसे—पूरे कंपनी समूह का संयुक्त दिवालापन (Group Insolvency), सीमा-पार दिवाला मामले (Cross-Border Insolvency) और लेनदारों द्वारा त्वरित समाधान प्रक्रिया शुरू करने के नए नियमों का जिक्र किया, जो कानूनी देरी को पूरी तरह समाप्त कर देंगे।

पारदर्शिता और संस्थागत क्षमता पर जोर

भारतीय दिवाला और दिवालियापन बोर्ड (IBBI) के अध्यक्ष रवि मित्तल ने कहा कि हालिया संशोधन दिवाला ढांचे को अधिक निष्पक्ष, कुशल और भविष्य के अनुकूल (Future-Ready) बनाएंगे।

  1. हितधारकों की मजबूत भागीदारी: इस विनियामक मंच पर कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अधिकारियों सहित प्रमुख कानूनी विशेषज्ञों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

  2. बैंकिंग क्षेत्र को संबल: नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) और इंडिया डेट रिजोल्यूशन कंपनी लिमिटेड जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी आईबीसी संशोधनों के बैंकिंग सेक्टर पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों पर चर्चा की। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य संशोधित प्रावधानों के प्रति सभी वित्तीय संस्थानों की समझ को और अधिक सुदृढ़ करना था।


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