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उच्च कीमतों से घटी सोने की मांग: दूसरी तिमाही में भारत में गोल्ड ज्वेलरी की खरीदारी 15% घटकर 75 टन पर सिमटी; वैल्यू में दर्ज हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी

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Posted On:Friday, July 31, 2026

वैश्विक बाजार में सोने की लगातार बढ़ती कीमतों और सीमा शुल्क में बढ़ोतरी के चलते भारत सहित दुनिया भर में सोने आभूषणों की खरीदारी पर असर पड़ा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council - WGC) द्वारा जारी नवीनतम 'गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स' रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल से जून) के दौरान भारत में गोल्ड ज्वेलरी की मांग में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान देश में ज्वेलरी की कुल खपत घटकर 75 टन (75.1 टन) रह गई, जो कोरोना महामारी के बाद के समय की सबसे कमजोर तिमाहियों में से एक है। वहीं, वैश्विक स्तर पर भी कुल ज्वेलरी डिमांड घटकर 278 टन पर आ गई।

रिपोर्ट के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि महंगे सोने के कारण भारतीय ग्राहकों ने भारी-भरकम आभूषणों की जगह हल्के वजन (Lightweight) और कम कैरेट वाले डिजाइनों को प्राथमिकता दी है। यद्यपि जनवरी-मार्च तिमाही की तुलना में अप्रैल-जून तिमाही में घरेलू मांग में 14% की क्रमिक (Sequential) रिकवरी देखी गई, लेकिन सालाना आधार पर यह गिरावट में ही रही। हालांकि, ऊंची कीमतों के कारण 2026 की पहली छमाही (H1) में ज्वेलरी मांग की कुल वैल्यू बढ़कर 21 अरब डॉलर (लगभग ₹1.98 लाख करोड़) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। यानी आम उपभोक्ताओं ने मात्रा में कम सोना खरीदा, लेकिन इसके लिए अब तक की सबसे अधिक धनराशि चुकाई।

अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर वैश्विक केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की आक्रामक खरीदारी जारी है। केंद्रीय बैंकों ने अप्रैल-जून तिमाही में अपने रिजर्व में 289 टन सोना जोड़ा, जो बीते वर्ष से 62% अधिक है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी इस अवधि में बुलियन भंडार को मजबूत किया है। डब्ल्यूजीसी के अनुसार, वर्ष की दूसरी छमाही में आगामी त्योहारी और वैवाहिक सीजन के कारण सोने की मांग को समर्थन मिलेगा, लेकिन यदि कीमतें ऐतिहासिक उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो आभूषणों की बिक्री पर दबाव कायम रह सकता है।


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