ताजा खबर
अडानी अहमदाबाद मैराथन को मिली बड़ी ग्लोबल पहचान, वर्ल्ड एथलेटिक्स कैलेंडर में हुआ शामिल   ||    IIM अहमदाबाद के गोल्ड मेडलिस्ट शुभम गोयल की कहानी, 30 लाख के पैकेज से माइक्रोसॉफ्ट कनाडा में 13 लोगो...   ||    IT रेड पर रकुल प्रीत सिंह ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- 20 साल की उम्र से भर रही हूं टैक्स   ||    ‘भारत में अब पहले जैसी शांति नहीं’, बयान पर घिरे संजय दत्त ने दी सफाई, बोले- मेरा मकसद किसी को ठेस प...   ||    अविनाश मिश्रा बने ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ के विनर, रोहित शेट्टी की ट्रॉफी के साथ जीते लाखों और नई कार   ||    ‘रणबाली’ की टिकट कीमतों पर मैथ्री मूवी मेकर्स ने तोड़ी चुप्पी, बोले- नहीं होगी कोई बढ़ोतरी   ||    विद्युत जामवाल बने धलसिम, ‘स्ट्रीट फाइटर’ में दिखेगा योग और एक्शन का जबरदस्त मेल   ||    बंदर और लंगूर में क्या है अंतर? जानें इनकी पहचान, खानपान और सामने आने पर बरतने वाली सावधानियां   ||    90 वर्ष की उम्र में जापानी बॉडीबिल्डर ने जीता 19वां राष्ट्रीय खिताब, शाकाहारी डाइट से सबको चौंकाया   ||    आईसीए ग्लोबल बोर्ड में चुने जाने के बाद अहमदाबाद पहुंचे इफको चेयरमैन दीलीप सांघाणी, जोरदार स्वागत   ||   

कृषि-रसायन क्षेत्र में डेटा संरक्षण की मांग: घरेलू कंपनियों ने कहा—प्रोपराइटी डेटा प्रोटेक्शन से किसानों को मिलेंगे आधुनिक और सुरक्षित समाधान

Photo Source :

Posted On:Thursday, August 20, 2026

नई दिल्ली: भारत की प्रमुख कृषि-रसायन निर्माता कंपनियों—क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन, रैलिस इंडिया, धनुका एग्रीटेक, पीआई इंडस्ट्रीज और गोदरेज एग्रोवेट—ने एक संयुक्त बयान जारी कर सरकार से 'नियामकीय डेटा संरक्षण' (Regulatory Data Protection - RDP) लागू करने की पुरजोर मांग की है। कंपनियों का कहना है कि नए और सुरक्षित रसायनों के पंजीकरण के दौरान नियामकों के पास जमा कराए गए शोध डेटा को एक निश्चित समय सीमा तक तीसरे पक्ष के साथ साझा न करने की व्यवस्था से देश के कृषि क्षेत्र और अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिलेगी। वर्तमान में भारत में कृषि-रसायनों के लिए डेटा संरक्षण की अवधि तय नहीं है, जबकि चीन में 6 वर्ष, अमेरिका में 10 वर्ष और यूरोपीय संघ में जैविक व पर्यावरण-अनुकूल रसायनों के लिए 13 वर्ष तक का संरक्षण दिया जाता है।

उद्योगजगत के विशेषज्ञों का तर्क है कि जलवायु परिवर्तन के कारण कीटों, खरपतवारों और बीमारियों में आ रहे नए प्रतिरोधी लक्षणों से निपटने के लिए भारतीय किसानों को कम मात्रा में उपयोग होने वाले और अधिक लक्षित प्रभाव वाले 'न्यू-जनरेशन मॉलिक्यूल्स' की तत्काल आवश्यकता है। क्रापलाइफ इंडिया और यस बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल कीटों और बीमारियों के कारण करीब 2 लाख करोड़ रुपये की फसल का नुकसान होता है। रैलिस इंडिया के प्रबंध निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला और धानुका एग्रीटेक के राहुल धानुका के मुताबिक, डेटा संरक्षण नीति से वास्तविक अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा, जिससे बहुराष्ट्रीय और घरेलू कंपनियां नई तकनीकों को भारतीय बाजारों में पेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगी। केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित नए 'कीटनाशक प्रबंधन विधेयक' के मसौदे के बीच यह मांग भारतीय कृषि-रसायन उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।


अहमदाबाद और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. ahmedabadvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.