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आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: पीएम मोदी की अपील का बड़ा असर, खाद्य तेल आयात में 29 फीसदी की भारी गिरावट

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Posted On:Wednesday, July 15, 2026

वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई एक विशेष अपील का देश में व्यापक असर देखने को मिल रहा है। मई 2026 में हैदराबाद के एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने देशवासियों से कुकिंग ऑयल (खाद्य तेल) की खपत कम करने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने और कुछ समय के लिए सोने की खरीद व विदेश यात्राओं को टालने जैसी महत्वपूर्ण अपीलें की थीं। इस जन-आंदोलन का सीधा और सकारात्मक परिणाम अब देश के व्यापारिक आंकड़ों में साफ दिखने लगा है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 में भारत का कुल खाद्य तेल आयात सालाना आधार पर 29 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ महज 11.46 लाख टन रह गया है, जो मौजूदा तेल वर्ष का सबसे निचला स्तर है।

भारत पारंपरिक रूप से अपनी घरेलू जरूरतों का लगभग 56 प्रतिशत खाद्य तेल विदेशों से मंगाता है, जिसके कारण देश के खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह आयात बिल 17.33 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जो कुल कृषि आयात का करीब दो-तिहाई हिस्सा था। लेकिन ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 में हुए 16.16 लाख टन आयात के मुकाबले इस साल जून में आयात में अभूतपूर्व कमी आई है। महीने-दर-महीने के आधार पर पाम ऑयल का आयात 10.5% घटकर 4.87 लाख टन और सोयाबीन तेल का आयात 23% गिरकर 3.81 लाख टन पर आ गया है। हालांकि, रूस और यूक्रेन से आने वाले सनफ्लावर ऑयल के आयात में आंशिक वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि खपत में आई यह स्वैच्छिक कमी न केवल भारत के महंगे आयात बिल को नियंत्रित करेगी, बल्कि घरेलू तिलहन उत्पादक किसानों को बढ़ावा देकर देश को खाद्य तेल क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी मोड़ साबित होगी।


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