ताजा खबर
डार्क चॉकलेट बनाम मिल्क चॉकलेट: स्वाद और सेहत की जंग में कौन है विजेता? जानिए विशेषज्ञों की राय   ||    गर्मियों में घर को ठंडा रखने का सही तरीका जानें कब खोलें और कब बंद करें अपनी खिड़कियां   ||    कुदरत का करिश्मा ये हैं दुनिया के सबसे ऊंचे पेड़ जो छूते हैं आसमान की ऊंचाइयां   ||    सफ एक रात की नींद पूरी न होने पर दमाग में क्या होता है वशेषज्ञों ने बताया चौंकाने वाला सच   ||    सफेद बालों से छुटकारा दिलाएगी प्राचीन जापानी तकनीक: लकड़ी की कंघी और मसाज का जादू   ||    ​गुजरात निकाय चुनाव: भाजपा की ऐतिहासिक जीत, गढ़ में हार और 'चायवाले' का पार्षद बनना   ||    ​अहमदाबाद: 35 साल बाद खुला कत्ल का राज, 'अदृश्य साये' के डर ने उगला सच   ||    यश स्टारर टॉक्सिक पोस्टपोन हुई, एक्टर ने शेयर की एक इमोशनल पोस्ट   ||    वरुण, पूजा और मृणाल ने ‘लाफ्टर शेफ्स 3’ में बढ़ाया एंटरटेनमेंट का लेवल   ||    ईरान में दमन का खौफनाक दौर युद्ध के बीच 21 लोगों को दी गई फांसी, 4000 से अधिक गिरफ्तार; UN ने जताई ग...   ||   

​गुजरात निकाय चुनाव: भाजपा की ऐतिहासिक जीत, गढ़ में हार और 'चायवाले' का पार्षद बनना

Photo Source : Google

Posted On:Thursday, April 30, 2026

अहमदाबाद न्यूज डेस्क: गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर भाजपा के वर्चस्व को साबित कर दिया है, जहाँ पार्टी ने 95 प्रतिशत सीटों पर कब्जा जमाकर इतिहास रच दिया। भाजपा ने 15 महानगरपालिकाओं और सैकड़ों जिला व तहसील पंचायतों की कुल 9992 सीटों में से 7491 पर जीत दर्ज की। हालाँकि, इस प्रचंड लहर के बीच अहमदाबाद का 'खाड़िया' वार्ड चर्चा का विषय बना रहा, जिसे जनसंघ के जमाने से भाजपा का सुरक्षित गढ़ माना जाता था। करीब 50 साल बाद यहाँ भाजपा को हार का स्वाद चखना पड़ा, जिसे पार्टी के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

​विपक्ष की बात करें तो अहमदाबाद में कांग्रेस को नया जीवनदान मिला है, जिसका मुख्य कारण असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का पूरी तरह सफाया होना रहा। पिछली बार सात सीटें जीतने वाली AIMIM इस बार अपना खाता भी नहीं खोल पाई, जिसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिला। अहमदाबाद महानगरपालिका की 192 सीटों में से भाजपा ने 160 और कांग्रेस ने 32 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं सूरत में आम आदमी पार्टी (AAP) को मतदाताओं ने पूरी तरह नकार दिया, जिससे उसकी सीटें 27 से घटकर मात्र 4 रह गईं। सूरत में 10 साल के लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस फिर से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही।

​इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा मेहसाणा के नवनिर्वाचित पार्षद रमेश भील की हो रही है। रमेश पिछले 28 वर्षों से भाजपा के जिला कार्यालय में चाय बनाने का काम कर रहे हैं। पार्टी ने उनकी निष्ठा को देखते हुए उन्हें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित वार्ड से टिकट दिया, जहाँ उन्होंने शानदार जीत हासिल की। रमेश की सादगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्षद बनने के बाद भी उन्होंने साफ कर दिया है कि वे पार्टी कार्यालय में अपनी चाय बनाने की नौकरी जारी रखेंगे। भाजपा ने इस प्रयोग के जरिए संदेश दिया है कि उनके यहाँ एक साधारण कार्यकर्ता भी ऊँचे पद तक पहुँच सकता है।

​समग्र रूप से देखा जाए तो भाजपा ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अपनी पकड़ और मजबूत की है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण और ओबीसी आरक्षण लागू होने के बाद यह पहला बड़ा चुनाव था, जिसमें भाजपा ने विरोधियों को पछाड़ दिया। अहमदाबाद के मेयर पद के लिए अब ओबीसी नेता हितेश बारोट का नाम सबसे आगे चल रहा है। कांग्रेस जहाँ अपनी संगठनात्मक कमजोरी के कारण पिछड़ गई, वहीं आम आदमी पार्टी के आंतरिक कलह ने उसे भारी नुकसान पहुँचाया। इन नतीजों ने गुजरात की राजनीति में भाजपा की जड़ें और गहरी कर दी हैं।


अहमदाबाद और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. ahmedabadvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.