ताजा खबर
प्लास्टिक वेस्ट प्रबंधन में अहमदाबाद मॉडल की हाई कोर्ट ने की सराहना   ||    अहमदाबाद विमान हादसे के बाद बोइंग 787 की सुरक्षा पर उठे सवाल   ||    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हल्दिया बल्क टर्मिनल राष्ट्र को किया समर्पित, पूर्वी तट की लॉजिस्टिक्स ...   ||    गैस संकट का असर: अहमदाबाद के एलडी इंजीनियरिंग कॉलेज मेस में लकड़ी के चूल्हे पर बनने लगा खाना   ||    अहमदाबाद में बुजुर्ग महिला से 47.35 लाख की साइबर ठगी, एनपीसीआई अधिकारी बनकर किया फोन   ||    गोवा ड्रग्स केस में ऑनलाइन सेक्स रैकेट का खुलासा, अहमदाबाद से जुड़े तार   ||    कटिहार के ग्रामीण इलाकों में गैस संकट, कई प्रखंडों में ठप हुई सप्लाई   ||    मेड इन इंडिया बुलेट ट्रेन दौड़ेगी मुंबई-अहमदाबाद रूट पर, 2027 तक शुरू होने की उम्मीद   ||    अहमदाबाद मनपा का कार्यकाल खत्म, 2500 करोड़ के प्रस्ताव पास; IAS मुकेश कुमार बने प्रशासक   ||    अहमदाबाद में T20 वर्ल्ड कप फाइनल का क्रेज: ₹20 हजार का होटल रूम ₹2 लाख तक, फ्लाइट किराया 5 गुना बढ़ा   ||   

सुप्रीम कोर्ट ने पोर्न वीडियो बैन पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया, कहा- नेपाल का उदाहरण देखें, जानिए पूरा मामला

Photo Source :

Posted On:Monday, November 3, 2025

मुंबई, 03 नवम्बर, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इंटरनेट पर पोर्न वीडियोज को प्रतिबंधित करने वाली याचिका पर तुरंत विचार करने से इनकार कर दिया। इस दौरान अदालत ने सितंबर में नेपाल में हुए GenZ प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि जब वहां सोशल मीडिया एप्स पर बैन लगाया गया, तो उसके नतीजे क्या हुए, यह सबने देखा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में जल्दबाजी से फैसला लेना उचित नहीं होगा।

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध लगाने वाली इस याचिका पर अब चार हफ्ते बाद सुनवाई की जाएगी। गौरतलब है कि चीफ जस्टिस गवई 23 नवंबर को अपने पद से रिटायर हो रहे हैं। याचिका में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि देश में अश्लील कंटेंट पर रोक लगाने के लिए एक राष्ट्रीय नीति (नेशनल पॉलिसी) तैयार की जाए। साथ ही बच्चों को इस तरह के कंटेंट से दूर रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया और पब्लिक प्लेटफॉर्म से ऐसे वीडियोज को पूरी तरह हटाया जाना चाहिए।

याचिका में यह तर्क दिया गया है कि डिजिटलीकरण के इस दौर में इंटरनेट पर अरबों अश्लील वेबसाइट्स उपलब्ध हैं और सरकार खुद इस बात को स्वीकार कर चुकी है। कोविड के समय बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए डिजिटल डिवाइस दिए गए, लेकिन उनमें पोर्न साइट्स को ब्लॉक करने का कोई मजबूत सिस्टम नहीं था। इसके अलावा देश में पोर्न वीडियोज को हटाने के लिए अब तक कोई ठोस कानून भी नहीं बना है, जबकि इस तरह की सामग्री का सबसे अधिक प्रभाव 13 से 18 साल के किशोरों पर पड़ता है।

अदालत ने इस विषय पर पहले भी कई बार चिंता जताई है। 28 अप्रैल 2025 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अश्लीलता एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है और इस पर केंद्र सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। कोर्ट ने तब सरकार के साथ 9 OTT और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। वहीं, 24 सितंबर 2024 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सेक्स एजुकेशन को वेस्टर्न कॉन्सेप्ट मानना गलत है। इस शिक्षा का उद्देश्य युवाओं में अनैतिकता फैलाना नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाना है। कोर्ट ने कहा था कि इसे भारतीय मूल्यों के खिलाफ बताकर कई राज्यों में प्रतिबंधित कर देना उचित नहीं है।


अहमदाबाद और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. ahmedabadvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.