देश भर के खुदरा और थोक व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) और ऑल इंडिया व्यापार मंडल (FAIVM) सहित प्रमुख व्यापारिक निकायों ने आगामी 2 अक्टूबर को राष्ट्रव्यापी 'नो यूपीआई डे' (No UPI Day) मनाने का आह्वान किया है। इस विरोध प्रदर्शन के तहत व्यापारी महात्मा गांधी जयंती के दिन किसी भी प्रकार का डिजिटल यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे तथा ग्राहकों को केवल नकद या कार्ड के माध्यम से लेनदेन करने के लिए प्रेरित करेंगे।
व्यापारियों का मुख्य विरोध ₹2,000 से अधिक के पीयर-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई लेन-देन पर 15 अक्टूबर से लागू होने वाले 0.40 प्रतिशत एमडीआर शुल्क को लेकर है। किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और सोने-चांदी के कारोबारियों का कहना है कि पहले से ही कम लाभ मार्जिन (Profit Margin) वाले क्षेत्रों पर यह शुल्क एक अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालेगा। महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स (MACCIA) और विभिन्न राज्यों के 500 से अधिक व्यापारिक संगठनों ने इस आंदोलन को अपना पूरा समर्थन दिया है। इससे पूर्व 23 सितंबर को मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में आयोजित सांकेतिक विरोध से व्यावसायिक गतिविधियों पर व्यापक असर देखने को मिला था।
व्यापारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 15 अक्टूबर की समयसीमा से पहले इस निर्णय को वापस नहीं लिया, तो देश भर के खुदरा विक्रेता यूपीआई क्यूआर कोड (QR Code) मशीनों का बहिष्कार कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।